महालक्ष्मी पूजन मुहुर्त २००९-२०१०

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                                 महालक्ष्मी पुजन हिंदुओ में ज्यादातर त्योहार,पर्व ऐसे आते है जो रात्रि को मनाये जाते हैकालरात्रीर्महारात्रिर्मोहरात्रीश्च दारुणा अर्थात महारात्री, दिपावली, जन्माष्टमी, होलीदहन जो मनुष्य को धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष प्रदान करते है चार महारात्रीयों में एक महारात्री दिपावली हैइस दिन धन की देवी लक्ष्मीजी का पुजन किया जाता है वैसे तो दिपावली को प्रदोषकाल में कभी भी पूजन किया जा सकता है लेकिन यदि लग्न शुध्दि का ध्यान रखा जाये तो अति उत्तम होगा।अलग अलग व्यक्तियों के नाम से अलग अलग मुहुर्त बनते है,फिर भी स्थिर लग्न में महालक्ष्मी का पूजन किया जाये तो विशेष फलदायी होता है गुजरात महाराष्ट्र में चौघडिया के अनुसार पूजन किया जाता है इसमें शुभ, अमृत, लाभ चौघडिये शुभ माने गये है इस साल दिपावली को शुभ चौघडिया दो.१.५१ से दो.३.१७ तक,अमृत दो.३.१७ से शा.४.४४ तक शुभ चौघडिया सु.८.०४ से ९.३० तक रहेगा। वृश्चिक  लग्न सु.८.४९ से सु.११.०४ तक,वृष रा.७.५४ से रा.९.५३ तक,सिंह लग्न रा.२.१९ से रा.४.२६ तक रहेगा। अच्छा तो यह होगा कि अपनी जन्मराशी से किसी विद्वान पंडित से शुभ लग्न पुछकर लक्ष्मीप्रशनार्थ देवी का पुजन करे ।