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Saturday, October 21 2017
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                      प्रायः जीवन में शनि की साढे सती तीन बार आती है। प्रथम बचपन में , दुसरी यौवनावस्था में और तीसरी वृध्दावस्था में । प्रथम का प्रभाव शिक्षा पर , द्वितीय का प्रभाव धन , मान-सम्मान, नौकरी - रोजगार आदि पर और तृतीय का प्रभाव आयु और स्वास्थ्य पर पडता है। ९ सितम्बर तक शनी सिंह राशी में रहेगा तथा ९ सितम्बर से वर्ष पर्यंत शनी कन्या राशी  में रहेगा. वर्ष के आरम्भ से ९ सितम्बर तक कर्क, सिंह,कन्या राशी  वालो को साढ़ेसाती एवम  मकर, वृष राशी वालो को ढैया रहेगा,एव, ९ सितम्बर से वर्ष  पर्यंत सिंह,कन्या, तुला राशीवालो  को साढ़ेसाती तथा कुम्भ,मिथुन राशी वालो को ढैया  रहेगा. जिस व्यक्ति की जन्म कुंड़ली में शनि अच्छे स्थान पर अपनी उच्च राशि में या किसी शुभ फल देने वाले अपने मित्र गृह के साथ स्थित हो, तथा दशा अन्तर्दशा अच्छी चल रही हो,  उनको शनि का अशुभ फल कम होगा। जिस व्यक्ति की जन्म कुंडलि में चंद्र-शनि अशुभ ग्रह से युक्त, अशुभ स्थानो में हो तो साढेसती और ढैया उस व्यक्ति के लिये चिंता धन हानि, कार्य में विघ्न  रोजगार में कमी परिवार में कलह, विघटन धन व्यय  का कारण   बनती हैं| शनि के अनिष्ट फल निवारण के   लिये तेल के छाया पात्र का दान करना चाहीये| शनि मंत्र का जाप, दशांश हवन हनूमानजी की पूजा अभिषेक , तेल यूक्त सिंदुर अर्पण कर भक्ति पूर्वक शनिवार का व्रत, सप्त धान्य का दान, शनिवार को पीपल का पूजन करने से शनि का अनिष्ट फल निवृत होता हैं|

 

 

 

 
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