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Tuesday, April 24 2018
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शुक्रतारा अस्त पी.डी.एफ़ छापें ई-मेल

                                                            शुक्रतारा अस्त ........

      इसे तारा अस्त होना भी कहते हैं |  देवालय,  बावडी,  कुँआ आदि का आंरभ और प्रतिष्ठा , यज्ञ , यात्रा , मु्डंन , जडुला, यज्ञोपवित ,  प्रथम विद्याआंरभ ,   गृहप्रवेश ,  कर्णभेदन   अर्थात परोजन , मंत्रोपदेश अर्थात गुरु बनाना , उद्यापन , वधु का प्रथम बार ससुराल जाना इत्यादी   कार्य गुरु और शुक्र के अस्त होने पर सिंहस्थ गुरु में तथा १३ दिन के पक्ष में , क्षय और   अधिकमास   अर्थात पुरुषोत्तम मास नहीं करना चाहीये  |  कई आचार्यों का ये मत हैं कि आभुषण और चूडा धारण   नहीं करना ही श्रेष्ठ हैं |  इसी विचार से मलमास, वर्ष के आरंभ से ले कर १४   अप्रेल   २००७   तक रहेगा |  इस के बाद      १६ दिसम्बर २००७     से १४ जनवरी    २००८ तक रहेगा |  एवम् १४ मार्च    २००८ से वर्षपंर्यंत मलमास रहेगा  |  शादी विवाह में थापा मांडणा, गणगौर मांडणी, तथा   नवरात्री में दुर्गा स्थापना, ये कार्य शुक्र   जिस   दिशा में उदय हो,   उसके विपरित दिशा   में मांडणा चाहिये |  इसलिये वर्ष के आरंभ से २२ अगस्त तक पूर्व दिशा में , २८ नवम्बर से वर्ष पर्यन्त तक पश्चिम दिशा में मांडणी चाहीये |

 
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