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Sunday, December 10 2017
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जाना था गंगा पार पी.डी.एफ़ छापें ई-मेल

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कभी कभी भगवान को भी, भक्तों से काम पडे |

जाना था गंगा पार, प्रभू केवट की नाव चढें ||

 

अवध छोड प्रभू वन को धायेंसियाराम लखन गंगा तट आये,

केवट मन ही मन हरषायें, घर बैंठे प्रभू दर्शन पाये |

हाथ जोड प्रभू के आगे ,केवट मगन खडें | | जाना था गंगा पार..

 

प्रभू बोले तुम नाव चलाओ , पार हमें केवट पहुँचाओ ,

केवट बोला सुनो हमारी, चरण धूली की महिमा हैं भारी |

मैं गरिब हूँ नैया हैं मेरी,ना नारी होय पडे..|| जाना था गंगा पार..

 

केवट दौड के जल भर लाये, चरण धोये चरणमृत पाये ,

वेद ग्रंथ जिनके यश गाये ,केवट उनको नाव चढायें |

बरसे ढुल गगन से ऐसे भक्तों के भाग्य बडे ||जाना था गंगा पार..

 

चली नाव गंगा की धारा ,सियाराम लखन को पार उतारा,

देने लगे प्रभू नाव उतराई, केंवट कहे नहीं रघुराई |

पार किया मैने प्रभू तुमको, अब तुम मोहें पार करो || जाना था गंगा पार..

 

कभी कभी भगवान को भी, भक्तों से काम पडे |

जाना था गंगा पार, प्रभू केवट की नाव चढें ||

 
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