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Tuesday, April 24 2018
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स्मार्त वैष्णव भेद पी.डी.एफ़ छापें ई-मेल

                                       स्मार्त वैष्णव भेद .......

                                         प्रायः पंचांगो में एकादशी व्रत , जन्माष्टमी व्रत स्मार्त जनों के लिए पहले दिन और वैष्णव लोगों के लिए दुसरे दिन बताया जाता है । इससे जनसाधारण भ्रम में पड जाते हैं । दशमी तिथ का मान ५४ घटी से ज्यादा हो तो वैष्णव जन द्वादशी तिथी को व्रत रखते हैं । अन्यथा एकादशी को ही रखते है । इसी तरह स्मार्त जन अर्ध्दरात्री को अष्टमी पड रही हो तो उसी दिन जन्माष्टमी मनाते है । जबकी वैष्णवजन उदया तिथी को जन्माष्टमी मनाते हैं , एवं व्रत भी उसी दिन रखते है । जो व्यक्ति श्रुति स्मृति में विश्वास रखता है , पंचदेव अर्थात ब्रह्मा ,विष्णु , महेश , गणेश , उमा को मानता है , वह स्मार्त हैं । जो किसी वैष्णव सम्प्रदाय के गुरु या धर्माचार्य से विधीवत दिक्षा लेता है , तथा गुरु से कंठी या तुलसी माला गले में ग्रहण करता है या तप्त मुद्रा से शंख चक्र का निशान गुदवाता है । ऐसे व्यक्ति ही वैष्णव कहे जा सकते है । अतः साधू सन्यासी विधवाओं को तथा जो वैष्णव संप्रदाय के किसी धर्माचार्य से दिक्षा ली हो ऐसे व्यक्ति को ही दूसरा व्रत अपनाना चाहिए । बाकी सभी स्मार्त है।

 
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