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Tuesday, July 17 2018
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                                                                  वास्तु पुजन.......

                                           नवीन घर का प्रवेश उत्तरायण सूर्य में वास्तु पुजन करके ही करना चाहीये  |  उसके पहले वास्तु का जप यथाशक्ती करा लेना चाहिये | शास्त्रानुसार गृह प्रवेश में माघ ,फाल्गुन ,वैशाख, ज्येष्ठ , आदि मास शुभ बताये गये है | माघ महीने में    प्रवेश करने वाले को धन का लाभ होता है | जो व्यक्ति अपने नये घर में  फाल्गुन मास में वास्तु पुजन करता है , उसे पुत्र,प्रौत्र और धन प्राप्ति दोनो होता है | चैत्र मास में नवीन घर में  रहने के लिये जाने वाले को धन का अपव्यय सहना पडता है | गृह प्रवेश बैशाख माह में करने वाले को धन धान्य की कोई कमी नहीं रहती है | जो व्यक्ति पशुओ  एवँम  पुत्र का सुख चाहता हो, ऐसे व्यक्ति को अपने नये मकान मे ज्येष्ठ माह में करना चाहिए | बाकी के महीने वास्तु पुजन व गृह प्रवेश में  साधारण फल देने वाले होते हैं| शुक्लपक्ष की प्रतिपदा से लेकर कृष्णपक्ष की दशमी तिथी तक वास्तुनुसार गृह प्रवेश वंश वृध्दि दायक माना गया है | धनु मीन के सुर्य यानी के मळमास में भी नये मकान में प्रवेश नहीं करना चाहीए | पुराने मकान को जो व्यक्ति नया बनाता है , और वापस अपने पुराने मकान  में जाना चाहे , तब उस समय उपरोक्त बातों पर विचार नहीं करना चाहीए | जिस मकान का द्वार दक्षिण दिशा में हो तो गृह प्रवेश एकम् , छठ , ग्यारस आदि तिथियों में करना चाहिए |  दूज , सातम् और बारस तिथि  को  पश्चिम  दिशा के द्वार का गृह प्रवेश श्रेष्ठ बतलाया गया है|

                                           नवीन घर का प्रवेश उत्तरायण सूर्य में वास्तु पुजन करके ही करना चाहीये  |  उसके पहले वास्तु का जप यथाशक्ती करा लेना चाहिये | शास्त्रानुसार गृह प्रवेश में माघ ,फाल्गुन ,वैशाख, ज्येष्ठ , आदि मास शुभ बताये गये है | माघ महीने में    प्रवेश करने वाले को धन का लाभ होता है | जो व्यक्ति अपने नये घर में  फाल्गुन मास में वास्तु पुजन करता है , उसे पुत्र,प्रौत्र और धन प्राप्ति दोनो होता है | चैत्र मास में नवीन घर में  रहने के लिये जाने वाले को धन का अपव्यय सहना पडता है | गृह प्रवेश बैशाख माह में करने वाले को धन धान्य की कोई कमी नहीं रहती है | जो व्यक्ति पशुओ  एवँम  पुत्र का सुख चाहता हो, ऐसे व्यक्ति को अपने नये मकान मे ज्येष्ठ माह में करना चाहिए | बाकी के महीने वास्तु पुजन व गृह प्रवेश में  साधारण फल देने वाले होते हैं| शुक्लपक्ष की प्रतिपदा से लेकर कृष्णपक्ष की दशमी तिथी तक वास्तुनुसार गृह प्रवेश वंश वृध्दि दायक माना गया है | धनु मीन के सुर्य यानी के मळमास में भी नये मकान में प्रवेश नहीं करना चाहीए | पुराने मकान को जो व्यक्ति नया बनाता है , और वापस अपने पुराने मकान  में जाना चाहे , तब उस समय उपरोक्त बातों पर विचार नहीं करना चाहीए | जिस मकान का द्वार दक्षिण दिशा में हो तो गृह प्रवेश एकम् , छठ , ग्यारस आदि तिथियों में करना चाहिए |  दूज , सातम् और बारस तिथि  को  पश्चिम  दिशा के द्वार का गृह प्रवेश श्रेष्ठ बतलाया गया है|
 
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