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Tuesday, April 24 2018
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श्री वृहस्पति देवता की आरती पी.डी.एफ़ छापें ई-मेल

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जय वृहस्पति देवा जय वृहस्पति देवा ।
छिन छिन भोग लगा‌ऊँ कदली फल मेवा ॥
तुम पूरण परमात्मा तुम अन्तर्यामी ।
जगतपिता जगदीश्वर तुम सबके स्वामी ॥
चरणामृत निज निर्मल सब पातक हर्ता ।
सकल मनोरथ दायक कृपा करो भर्ता ॥
तन, मन, धन अर्पण कर जो जन शरण पड़े ।
प्रभु प्रकट तब होकर आकर द्घार खड़े ॥
दीनदयाल दयानिधि भक्तन हितकारी ।
पाप दोष सब हर्ता भव बंधन हारी ॥
सकल मनोरथ दायक सब संशय हारो ।
विषय विकार मिटा‌ओ संतन सुखकारी ॥
जो को‌ई आरती तेरी प्रेम सहित गावे ।
जेठानन्द आनन्दकर सो निश्चय पावे ॥

 ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी जय लक्ष्मीरमणा |

सत्यनारायण स्वामी ,जन पातक हरणा

 रत्नजडित सिंहासन , अद्भुत छवि राजें |

नारद करत निरतंर घंटा ध्वनी बाजें ॥ ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी.....

प्रकट भयें कलिकारण ,द्विज को दरस दियो |   

बूढों ब्राम्हण बनके ,कंचन महल कियों ॥ ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी.....

दुर्बल भील कठार, जिन पर कृपा करी |

च्रंदचूड एक राजा तिनकी विपत्ति हरी ॥ ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी.....

 वैश्य मनोरथ पायों ,श्रद्धा तज दिन्ही |

सो फल भोग्यों प्रभूजी , फेर स्तुति किन्ही ॥ ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी.....

भाव भक्ति के कारन .छिन छिन रुप धरें |

 श्रद्धा धारण किन्ही ,तिनके काज सरें ॥ ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी.....

ग्वाल बाल संग राजा ,वन में भक्ति करि |

मनवांचित फल दिन्हो ,दीन दयालु हरि ॥ ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी.....

 चढत प्रसाद सवायों ,कदली फल मेवा |

 धूप दीप तुलसी से राजी सत्य देवा ॥ ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी.....

सत्यनारायणजी की आरती जो कोई नर गावे |

ऋद्धि सिद्धी सुख संपत्ति सहज रुप पावे ॥ ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी.....

 ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी जय लक्ष्मीरमणा |

 सत्यनारायण स्वामी ,जन पातक हरणा ॥

 
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