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Tuesday, April 24 2018
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श्री अच्युताष्टकं पी.डी.एफ़ छापें ई-मेल

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अच्युतं केशवं राम नारायणं कृष्ण दामोदरं वासुदेवं हरिम् ।
श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं जानकीनायकं रामचन्द्रं भजे ॥१॥
अच्युतं केशवं सत्यभामाधवं माधवं श्रीधरं राधिकाराधितम् ।
इन्दिरा मन्दिरं चेतसा सुन्दरं देवकीनन्दनं नन्दनं संदधे ॥२॥
विष्णवे जिष्णवे शङ्खिने चक्रिणे रुक्मिनी रागिने जानकी जानये ।
वल्लवी वल्लभायाऽर्चितायात्मने कंस विध्वंसिने वंशिने ते नमः ॥३॥
कृष्ण गोविन्द हे राम नारायण श्रिपते वासुदेवाचित श्रिनिधे ।
अच्युतानन्त हे माधवाधोक्षज द्वारका नायक द्रौपदी रक्षक ॥४॥
राक्षसक्षोभितः सीतयाशोभितो दण्डकारण्य भू पुण्यता कारणः ।
लक्ष्मणेनान्वितो वानरैः सेवितोऽगस्त्संपूजितो राघवः पातु माम् ॥५॥
धेनुकारिष्टकोऽनिष्टकृद् द्वेषिणां केशिहा कंसहृद् वंशिकावादकः ।
पूतनाकोपकः सूरजा खेलनो बाल गोपालकः पातु माम् सर्वदा ॥६॥
विद्युदुद्धयोतवान प्रस्फुरद्वाससं प्रावृडम्भोदवत् प्रोल्लसद्विग्रहम् ।
वन्यया मालया शोभितोरस्थलं लोहितांघ्रिदूयं वारिजाक्षं भजे ॥७॥
कुञ्चितैः कुन्तलैर्भ्राजिमानाननं रत्नमौलिं लसत् कुण्डलं गण्डयोः ।
हारकेयूरकं कङ्कण प्रोज्ज्वलं किङ्किणी मञ्जुलं श्यामलं तं भजे ॥८॥
 
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सुविचार

सुख के सब साथी दुखः में ना कोय | जो सुख में सुमिरन करे तो दुखः काहे को होय ||

 
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