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Monday, December 11 2017
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|| श्री जगदीशजी की आरती || पी.डी.एफ़ छापें ई-मेल

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  आरती

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पुष्पांजली

जय जगदीश हरे स्वामी जय जगदीश हरे |

भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावें फल पावै दुख बिनसे मन का

सुख संपत्ती घर आवें कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय जगदीश.....

मात पिता तुम मेरे शरण गँहू किसकी |

तुम बिन और न दूजा आस करुँ जिसकी॥ ॐ जय जगदीश.....

 तुम पुरण परमात्मा तुम अंतरयामी |

पारब्रम्ह परमेश्वर तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय जगदीश.....

तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता |

मैं मूरख खल कामी कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय जगदीश.....

तुम हो एक अगोचर सबके प्राणपती |

 किस विधी मिलूँ दयामय तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय जगदीश.....

 दीनबंधु  दुखहर्ता तुम ठाकुर मेरे |

अपने हाथ उठाओं द्वार पडा मैं तेरे॥ ॐ जय जगदीश.....

 विषय विकार मिटाओं पाप हरो देवा |

श्रद्धा भक्ति बढाओं संतन की सेवा॥ ॐ जय जगदीश.....

तन मन धन सब कुछ हैं तेरा |

तेरा तुझ को अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय जगदीश....

जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे |

कहत शिवानंद स्वामी मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय जगदीश.....

ॐ जय जगदीश हरे  स्वामी जय जगदीश हरे |

 भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥

 
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