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Wednesday, August 16 2017
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|| गणेशजी की आरती || पी.डी.एफ़ छापें ई-मेल

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ॐ गजाननं भूंतागणाधि सेवितम्, कपित्थजम्बू फलचारु भक्षणम् |

उमासुतम् शोक विनाश कारकम्, नमामि विघ्नेश्वर पादपंकजम् ||

गणपति की सेवा मंगल मेवा सेवा से सब विघ्न टरै |

तीन लोक तैतिस देवता द्वार खडे सब अरज कारै ॥

रिद्धी सिद्धी दक्षिण वाम विराजे, अरु आंनद से चवँर ढ़ुले |

धूप दीप और लिये आरती भक्त खडे जयकार करे ॥ गणपति की सेवा......

गुड के मोदक भोग लगे हैं, मुषक वाहन चढ़ा करैं |

सौम्यरुप सेवा गणपति की, विघ्न भाग जा दूर पडे ॥ गणपति की सेवा......

 भादों मास और शुक्ल चतुर्थी दिन दोपहरी पूर्ण पडे |

लियो जन्म गणपति प्रभुजी ने दुर्गा मन आनंद भये ॥ गणपति की सेवा......

अद्भुत बाजा बजे इंद्र का, देववधू जयगान करे |

श्री शंकर जी के आनंद उपज्यों,नाम सुने सब विघ्न टरैं॥ गणपति की सेवा......

आनि विधाता बैठे आसन, इंद्र  अप्सरा नृत्य करे |

देख वेद ब्रम्हाजी जाको विघ्नविनायक नाम धरै ॥ गणपति की सेवा......

एक दंत गजबदन विनायक, त्रिनयन रुप अनूप धरैं |

पग खम्बा सा उदर पुष्ट हैं देख चंद्रमा हास्य करैं ॥ गणपति की सेवा......

दे श्राप श्री चंद्र देव को कलाहीन तत्काल करें |

चौदह लोक मे फिरे गणपति तीन भवन में राज्य करैं ॥ गणपति की सेवा.....

उठी प्रभात जब धरें ध्यान कोई ताके कारज सर्व सरे |

पूजा काले गावे आरती, ताके सिर यश छत्र फिरे ॥ गणपति की सेवा......

गणपति की पूजा पहले करनी, काम सभी निर्विघ्न सरै |

 श्री प्रताप गणपति प्रभुजी की हाथ जोड स्तुति करैं ॥ गणपति की सेवा......

 गणपति की सेवा मंगल मेवा, सेवा से सब विघ्न टरै |

तीन लोक तैतिस देवता द्वार खडे सब अरज करै ॥

 
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जो मेरे भाग्य में नहीं हैं, वो मुझे दुनियाँ की कोई भी शक्ति नहीं दे सकती और जो मेरे भाग्य में हैं उसे दुनियाँ कोई भी शक्ती छीन नहीं सकती हैं |

 
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