मुख्य पृष्ट arrow आरती संग्रह arrow ।। शिवजी की आरती ।।
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Monday, October 23 2017
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कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारं |

सदा वसन्तं ह्रदयाविन्दे भंव भवानी सहितं नमामि ॥

जय शिव ओंकारा हर ॐ शिव ओंकारा |

ब्रम्हा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव ओंकारा......

एकानन चतुरानन पंचांनन राजे |

हंसासंन,गरुड़ासन,वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव ओंकारा......

दो भुज चारु चतुर्भज दस भुज अति सोहें |

तीनों रुप निरखता त्रिभुवन जन मोहें॥ ॐ जय शिव ओंकारा......

अक्षमाला,बनमाला,रुण्ड़मालाधारी |

चंदन, मृदमग सोहें, भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव ओंकारा......

श्वेताम्बर,पीताम्बर, बाघाम्बर अंगें |

सनकादिक, ब्रम्हादिक, भूतादिक संगें॥ ॐ जय शिव ओंकारा......

कर के मध्य कमड़ंल चक्र ,त्रिशूल धरता |

जगकर्ता, जगभर्ता, जगससंहारकर्ता ॥ॐ जय शिव ओंकारा...... 

ब्रम्हा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका |

प्रवणाक्षर मध्यें ये तीनों एका॥ ॐ जय शिव ओंकारा......

काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रम्हचारी |

नित उठी भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव ओंकारा......

त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई नर गावें |

कहत शिवानंद स्वामी मनवांछित फल पावें ॥ॐ जय शिव ओंकारा.....

जय शिव ओंकारा हर ॐ शिव ओंकारा|

ब्रम्हा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा......

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 


 
 


 

 


 

 
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जब तू आया जगत में, लोग हँसे तू रोये| ऐसी करनी न करी, पाछे हँसे सब कोय ||

 
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