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Wednesday, August 23 2017
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भये प्रगट कृपाला दीनदयाला पी.डी.एफ़ छापें ई-मेल

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भये प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी .

हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी ..


लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुज चारी .

भूषन वनमाला नयन बिसाला सोभासिन्धु खरारी ..


कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौं अनंता .

माया गुन ग्यानातीत अमाना वेद पुरान भनंता ..


करुना सुख सागर सब गुन आगर जेहि गावहिं श्रुति संता .

सो मम हित लागी जन अनुरागी भयौ प्रकट श्रीकंता ..


ब्रह्मांड निकाया निर्मित माया रोम रोम प्रति बेद कहै .

मम उर सो बासी यह उपहासी सुनत धीर मति थिर न रहै ..


उपजा जब ग्याना प्रभु मुसुकाना चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै .

कहि कथा सुहाई मातु बुझाई जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै ..


माता पुनि बोली सो मति डोली तजहु तात यह रूपा .

कीजे सिसुलीला अति प्रियसीला यह सुख परम अनूपा ..


सुनि बचन सुजाना रोदन ठाना होइ बालक सुरभूपा .

यह चरित जे गावहि हरिपद पावहि ते न परहिं भवकूपा ..

बिप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार .

निज इच्छा निर्मित तनु माया गुन गो पार ..

 
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