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Monday, October 23 2017
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सूरत दीनानाथ से लगी पी.डी.एफ़ छापें ई-मेल

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सूरत दीनानाथ से लगी तू तो समझ सुहागण सुरता नार।।

लगनी लहंगो पहर सुहागण बीतो जाय बहार।

धन जोबन है पावणा रो मिलै न दूजी बार।।

राम नाम को चुडलो पहिरो प्रेम को सुरमो सार।

नकबेसर हरि नाम की री उतर चलोनी परलै पार।।

ऐसे बर को क्या बरूं जो जनमें औ मर जाय।

वर वरिये इक सांवरो री चुडलो अमर होय जाय।।

मैं जान्यो हरि मैं ठग्यो री हरि ठगि ले गयो मोय।

लख चौरासी मोरचा री छिन में गेरह्ह्या छे बिगोय।।

सुरत चली जहां मैं चली री कृष्ण नाम झणकार।

अविनासी की पोल मरजी मीरा करै छै पुकार।।२।।

 
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