मुख्य पृष्ट arrow आरती संग्रह arrow श्री संकटनाशनगणेशस्तोत्र
दिनमान लघु पंचांग
मुख्य पृष्टपंचांगचौघडियाँमुहूतॅआरती संग्रहव्रत त्योहारभजन संग्रहराशिफलखोजेंअन्य जानकारीहमें सम्पर्क करें
Monday, October 23 2017
मुख्य मैन्यु
मुख्य पृष्ट
पंचांग
चौघडियाँ
मुहूतॅ
आरती संग्रह
व्रत त्योहार
भजन संग्रह
राशिफल
खोजें
अन्य जानकारी
हमें सम्पर्क करें
श्री संकटनाशनगणेशस्तोत्र पी.डी.एफ़ छापें ई-मेल

Image

श्रीगनेणाय नम:। नारद उवाच। प्रणम्यं शिरसा देव गौरीपुत्रं विनायकम्।
भक्त्या व्यासं: स्मरोनित्यमायु:कामार्थसिद्धये।।1।।

प्रथमं वक्रतुण्डंच एकदन्तं द्वितीयकम्।
तृतीयं कृष्णं पिङा्‍गक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम्।।2।।
लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च।
सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्ण तथाष्टमम् ।।3।।
नवमं भलाचन्द्रं च दशमं तु विनायकम्।
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम्।।4।।
द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्य य: षठेन्नर:।
न च विघ्नभयं तस्य सर्वासिद्धिकरं प्रभो।।5।।
विद्यार्थी लभते विद्या धनार्थी लभते धनम्।
पुत्रार्थी लभते पुत्रान् मोक्षार्थी लभते गतिन् ।।6।।
जपेदू गणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासै: फलं लभेत्।
संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशय: ।।7।।
अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा य: समर्पयेत्।
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादत:।।8।।
इति श्रीनारपुराणें संकटनाशनस्तोत्रं संपूर्णम्।

 
< पिछला   अगला >
सुविचार

बिन मांगे मोती मिले मांगे मिले ना भीख |

 
© 2017 दिनमान लघु पंचांग