मुख्य पृष्ट arrow आरती संग्रह arrow ॥ अथ महालक्ष्म्यष्टकस्त्रोत्रम्‌ ॥
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Wednesday, August 16 2017
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॥ अथ महालक्ष्म्यष्टकस्त्रोत्रम्‌ ॥ पी.डी.एफ़ छापें ई-मेल
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                                           इन्द्र उवाच,

नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते ।

शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥ १॥

नमस्ते गरुडारूढे कोलासुरभयङ्करि ।

सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥ २॥

सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्टभयङ्करि ।

सर्वदुःखहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥ ३॥

सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि ।

मन्त्रपूते सदा देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥ ४॥

आद्यन्तरहिते देवि आद्यशक्तिमहेश्वरि ।

योगजे योगसम्भूते महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥ ५॥

स्थूलसूक्ष्ममहारौद्रे महाशक्तिमहोदरे ।

महापापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥ ६॥

पद्मासनस्थिते देवि परब्रह्मस्वरूपिणि ।

परमेशि जगन्मातर्महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥ ७॥

श्वेताम्बरधरे देवि नानालङ्कारभूषिते ।

जगत्स्थिते जगन्मातर्महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥ ८॥

महालक्ष्म्यष्टकं स्तोत्रं यः पठेद्भक्तिमान्नरः ।

सर्वसिद्धिमवाप्नोति राज्यं प्राप्नोति सर्वदा ॥ ९॥

एककाले पठेन्नित्यं महापापविनाशनम् ।

द्विकालं यः पठेन्नित्यं धनधान्यसमन्वितः ॥ १०॥

त्रिकालं यः पठेन्नित्यं महाशत्रुविनाशनम् ।

महालक्ष्मिर्भवेन्नित्यं प्रसन्ना वरदा शुभा ॥ ११॥

॥ इतीन्द्रकृतं महालक्ष्म्यष्टकस्त्रोत्रं सम्पूर्णम्‌ ॥

 
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साईं इतना दिजिये, जामे कुंटुब समाये | मैं भूखा ना रहुँ, साधु ना भूखा जाये ||

 
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