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Saturday, October 21 2017
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सुखकर्ता दु:खहर्ता वार्ता विघ्नाची पी.डी.एफ़ छापें ई-मेल
   

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सुखकर्ता दु:खहर्ता वार्ता विघ्नाची
नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची
सर्वांगी सुंदर उटि शेंदुराची
कंठी झळके माळ मुक्ताफळांची ।। १ ।।

जयदेव जयदेव जय मंगलमुर्ती
दर्शनमात्रे मन:कामना पुरती ।। धृ ।।

रत्नखचित फरा तुज गौरीकुमरा
चंदनाची उटी कुंकुमकेशरा
हिरेजडीत मुगुट शोभतो बरा
रुणझुणती नूपूरे चरणी घागरिया ।। २ ।।

लंबोदर पीतांबर फणिवरबंधना
सरळ सोंड वक्रतुंड त्रिनयना
दास रामाचा वाट पाहे सदना
संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवरवंदना ।। ३ ।।

घालीन लोटांगण वंदीन चरण ।
डोळ्यांनी पाहिन रुप तुझे ॥
प्रेमें आलिंगिन आनंदे पूजीन ।
भावें ओवाळिन म्हणे नामा ॥१॥

त्वमेव माता च पिता त्वमेव त्वमेव बंधुश्च सखा त्वमेव ।
त्वमेव विद्या द्रविडं त्वमेव त्वमेव सर्वं मम देवदेव ॥२॥

कायेन वाचा मनसेन्द्रियैवा बुद्धयात्मना वा प्रकृतिस्वभावात ।
करोमि यद्यत्सकलं परस्मै नारायणायेति समर्पयामि ॥३॥

अच्युतं केशवं रामनारायणं कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम् ।
श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं जानकीनायकं रामचंद्रं भजे ॥४॥

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ॥५॥

 

 
 
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