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Sunday, December 10 2017
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बछबारस व्रतकथा पी.डी.एफ़ छापें ई-मेल
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   एक बार राजा ने एक तालाब बनवाया। चारो ओर से उसकी दीवार पक्की करा दी गई परन्तु तालाब में पानी नही भरा। तब राजा ने ज्योतिषी से इसका कारण पुछा तो उसने बताया कि अगर आप अपने नाती की बलि देवे और यज्ञ करे तो तालाब पानी से भर जायेगा यज्ञ मे बच्चे की बलि दी गई। और तालाब वर्षा हने पर पानी भर गया। राजा ने तालाब का पूजन किया। पीछे उनकी नौकरानी ने गाय के बछडे को काटकर साग बना दिया। लौटने पर जब राजा रानी ने नौकरान से पूछा,”बछडा कहा गया"? नौकरानी ने कहा उसकी मैने सब्जी बना दी है राजा कहने लगा-पापिन तुने यह क्या कर दिया। राजा ने मांस की हांडी को जमीन में गाड दिया। शाम को जब गाय वापस आयी तो उस जगह को अपने सींगो से खोदने लगी। जहाँ पर बछडे के मांस की हांडी गाढी गई थी। जब सीग हांडी में लगा तो गाय ने उसे बाहर निकाला उस हांडी में से गाय का बछडा एवं राजा का नाती जीवित निकले उस दिन से इसे ओक दुंआस के रूप मे मनाया जाता है ।

 
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