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Wednesday, August 16 2017
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चन्द्र छट व्रतकथा पी.डी.एफ़ छापें ई-मेल

                             किसी नगर में एक सेठ और सेठानी रहते थे सेठानी मासिक धर्म के समय भी बर्तनो को स्पर्श करती फिरती थी कुछ समय पश्चात् सेठ और सेठानी की मृत्यु को गई मृत्यु पश्चात् सेठ को बैल और सेठानी को कुतिया की योनि प्राप्त हुई । दोनो अपने पुत्र के घर मे रहते थे बैल खेत जोतता और कुतिया घर की रखवाली करती थी पिता का श्राद्ध था पत्नि ने खीर बनाई वह किसी काम से बाहर गई और एक चील खीर के बर्तप में साँप डाल गई बहु को इस बात का पता नही था पर कुतिया सब देख रही थी उसे पता था की खीर में चील ने साँप गिरा गई है कुतिया ने सोचा कि इस खीर को खाने से ब्राह्यण मर जायेगे। अतः कुतिया ने खीर के भगोने में मुह डाल दिया ।गुस्से में भरकर बहू ने कुतिया को जलती हुई लकडी से मारा जिससे उसकी रिढ की हड्डी टूट गई बहु ने वह खीर फेंफ दी और दुसरी खीर बनाई सब ब्राह्यण भोजन करके चले गए परन्तु कुतिया को बहु ने झुठन तक नही दी रात होने पर कुतिया और बैल बाते करने लगे कुतिया बोली,”आज तो तुम्हारा श्राद्ध था तुम्हे खूब खाने को मिला होगा मुझे तो आज कुछ खाने को नही मिला, उल्टे मेरी पिटाई और हो गई उसने उपरोक्त खीर और साँप वाली बात बैल को बता दी “। बैल बोला,”आज तो मै भी भूखा हूँ कुछ खाने को नही मिला । आज तो दोनो दिना की उपेक्षा काम अधिक करना पडा। बेटा और बहु बैल तथा कुतिया की वार्तालाप सुन रहे थे। बेटे ने पडितो को बुलाकर पूछा की उसके माता पिता किस योनि में है। पडितो ने बताया कि माता कुतिया की योनि और बाप बैल की योनि में तुम्हारे घर मे ही है। लडका सारा रहस्य जान गया । उसने अपने माता पिता (बैल और कुतिया) का भर भंोजन करवाया और पंडितो को उनकी वर्तमान योनि से छूटने का उपाय पूछा । पंडिता ने परामर्श दिया कि भाद्रपद की कृष्ण पक्ष की षष्टी को जब कुँवारी कन्याएँ चन्द्रमा को अर्ध्य देने लगे तो ये दोनो प्राणी यदि अर्ध्य के नीचे खडे हो जाये तो इनको इनकी योनियो से छुटकारा मिल जायेगा। तुम्हारी माँ ऋतुकाल में सब बर्तन छूती थी, इस कारण इसी दोष से इसे यह योनि मिली थी।“ आने वाली चन्द्र षष्टी पर लडके ने उपरोक्त बातो का पालन किया, जिससे उसके माता पिता को कुतिया एवं बैल की योनि से छुटकारा मिल गया ।

 
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