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Monday, October 23 2017
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पायो जी मैंने, राम रतन धन पायो .. पी.डी.एफ़ छापें ई-मेल

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पायो जी मैंने, राम रतन धन पायो ..

वस्तु अमोलिक, दी मेरे सतगुरु, किरपा करि अपनायो

जनम जनम की पूंजी पाई, जग में सभी खोवायो

खरचै न खूटै, जाको चोर न लूटै, दिन दिन बढ़त सवायो

सत की नाव, खेवटिया सतगुरु, भवसागर तर आयो

मीरा के प्रभु गिरिधर नागर, हरष हरष जस गायो...

 
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