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Wednesday, November 14 2018
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वृंदावन का कृष्ण कन्हैया पी.डी.एफ़ छापें ई-मेल

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वृंदावन का कृष्ण कन्हैया ,सबकी आँखों का तारा |

मन ही मन क्यों डरे राधिका ,मोहन तो हैं सबका प्यारा ॥

जमुना तट पर नंद का लाला जब जब रास रचाये हो

तन मन डोले कान्हा ऐसी बंसी मधुर बजाये रे ॥

सुध बुध भुली खडी गोपियाँ जाने कैसा जादु डाला ॥ वृंदावन का कृष्ण कन्हैया .....

 रंग सलोना ऐसा जैसे छाई हो घटा सावन की |

ऐ री मैं तो हुई दिवानी ,मनमोहन मन भावन की ॥

 तेरे कारण देख साँवरे ,छोड दिया मैनें जग सारा ॥ वृंदावन का कृष्ण कन्हैया ....

वृंदावन का कृष्ण कन्हैया ,सबकी आँखों का तारा |

मन ही मन क्यों डरे राधिका ,मोहन तो हैं सबका प्यारा ॥

 
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