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Wednesday, August 16 2017
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१२ महिनों के व्रत त्यौहार पी.डी.एफ़ छापें ई-मेल

                                                            चैत्र    सुदी.....अप्रैल .....

चैत्र सुदी एकम् को हिंदु समाज का नव वर्ष का आरंभ होता हैं। इसे सभी हिंदु धर्म के लोग काफी उल्लास से मनाते हैं।  महाराष्ट् में नववर्ष को गुडी पाडवा भी कहते हैं। इस दिन से नव रात्रौं की घट स्थापना होती हैं। नौ दिन तक दुर्गा माता के सप्तशती के पाठ किये जाते हैं। और रामायण के पाठ किये जाते हैं। नौ दिन तक उपवास रखा जाता हैं।  माँ दुर्गा को शक्ति की देवी माना जाता हैं। और ९ वें दिन ९ कन्याओं की पूजा करके उन्हें भोजन कराके दक्षिणा दी जाती हैं। इन्हीं दिनों नवरात्री के बीच में गणगौर की पुजा भी की जाती हैं,जिसमें सभी सुहागनें पार्वती रुपी गौरा की १६ दिनो की पूजा का समापन करती हैं।  चैत्र के ९ वें दिन में ही राम जन्म के रुप में राम नवमी मनाते हैं। चैत्र मास के पहले पखवाडें में कामदा एकादशी आती हैं। चैत्र सुदी पूर्णिमा के दिन ही हनुमान जयंती मनातेहैं। मंदिर में ज। के प्रसाद का भोग लगाते हैं।                        वैशाख बदी ... अप्रैल ....

इस माह में पहला त्यौंहार चतुर्थी व्रत का आता हैंजिसमें गणेश चौथ का व्रत पति और संतान की लम्बी आयु के लिये किया जाता हैं | और चंद्र दर्शन के पश्चात भोजन करते हैंबासेडा भी इस माह के सोमवार शुक्रवार या बुधवार को करना चाहीये| रात को बना हुआ खाने का शीतला माता के भोग लगा के वो ही लेना चाहीये | उसके पहले गर्म वस्तु खाना वर्जित हैं| इस पखवाडे में वरुथिनी नामक एकादशी आती हैंबदी में ही अमावस्या आती

                     वैशाख सुदी .......

सुदी में आखातीज मनाई जाती हैं, जिसमें कोई शुभ मुर्हुत ना होने पर भी सभी शुभ कार्य किये जाते हैंइसे अक्षय तृतिया भी कहते हैं |  परशुरामजी का जन्म वैशाख शुक्ल पक्ष की तीसरी तिथि अर्थात तृतीया को रात्रि के प्रथम प्रहर में हुआ था। अतः इस दिन को परशुराम जयंती के रूप में मनाते हैं। और आखा तीज को ही भगवान बद्रीनाथ जी के पट भी इसी दिन खुलते हैं | वैशाख सुदी नौमी को सीता नवमी मनाई जाती हैं |  इस पखवाडे मोहनी नामक एकादशी आती हैं सुदी तेरस को नृसिंह अवतार होने के कारण इसको नृसिंही जंयती भी कहते हैं | वैशाख की पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा कहते

                             जेठ बदी.....मई....

जेठ बदी एकम् को नारद जंयती मानी जाती हैं |  जेठ के महिने में भी चतुर्थी व्रत आता हैं, जिसे महिलायें करती हैं | अष्टमी को बंगाल में त्रिलोकाष्टमी मानी जाती हैं | जेठ बदी   को अपरा एकादशी आती हैं| अमावस्या के दिन शनि देव का जन्म होने के कारण इसे शनैश्वर जयंती के रुप में भी मनाते हैं |  वट सावत्री व्रत भी जेठ के मास मे किया जाता हैं | महिलायें पुरे मास बरगद पूजा करती हैं |

                                                                 जेठ सुदी......मई..

गंगा दशहरे का आरंभ सुदी के एकम् के दिन होता हैं |  भगीरथ ने गंगा को धरती पर लाने के लिये काफी कठोर तपस्या की थी | एकम् को शुरु हो के गंगा दशहरा दशमी को मनाया जाता हैं उस दिन गंगा धरती पर प्रकट हुई थी | वैशाख माह में निर्जला एकादशी आती हैं, इस दिन कहते है कि यदि सामर्थ्य हो तो बिना पानी पिये ये व्रत करना चाहिये, और दुसरे दिन पानी से भरा मटका या बाल्टी देनी चाहिये | पूर्णिमा के दिन वट सावत्री का व्रत पूर्ण होता हैं |

                                                        आषाढ़ बदी....जून...

 चतुर्थी व्रत सबसे पहले आता हैं| आषाढ़ बदी कि पाँचम को बंगाल की नागपांचम होती हैं, जिसमें नाग देवता की पूजा की जाती हैंबदी की एकादशी का नाम योगिनी एकादशी हैं |जिसमें हर बार की तरह फलाहार करते हैबदी की अमावस्या को देवपुतृअमावस्या कहते हैं  |

                                                       आषाढ़ सुदी.....जून

सुदी की दूज को रथ यात्रा निकलती है, जिसमें भगवान जगदीश जी की पूजा की जाती हैं |  जगन्नाथ पूरी में काफी धूमधाम से यात्रा निकालते हैंसुदी की ग्यारस को देव शयनी  एकादशी कहते हैं, कहा जाता हैं कि इस दिन भगवान विष्णू क्षीर सागर में शयन करने जाते हैं |   इसी पखवाडे के बारस को भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया था और तेरस से कन्याओं का जयापार्वती व्रत आंरभ होता हैं| आषाढ़ की पूर्णिमा को गुरु पुर्णिमा कहते हैं जिस ने किसी को गुरु बनाया हो उन्हें इस दिन गुरु को भेंट देनी चाहीये |

                                                          श्रावण बदी...जुलाई...

पूरे सावन में भगवान को हिंडोला देना चाहीये | चतुर्थी व्रत के समय रात को अरग देकर खाना खाना चाहिये | राजस्थानीयों का नागपंचमी सावन की पाँचम को आता हैं |
उस दिन भी ठंडा भोजन करना चाहीये और नाग देवता की पूजा करनी चाहीये | सावन का महिना शिव पूजा के लिये उत्तम माना गया हैं, कई लोग पूरे सावन का एक बार भोजन कर के व्रत करते है जिनमें सोमवार प्रमुख हैंहर मंगलवार को सावन में मंगला गौरी व्रत आता हैं जिनका उद्यापन १६ या २० व्रत के बाद होता हैं | सावन में कामिका एकादशी आती हैंऔर हरियाली अमावस्या आती हैं |

 

                                                            श्रावन ...सुदी....जूलाई...

सावन की तीज को सिंधारा मनाया जाता हैं, जिनमें घर की लडकीयों रुपयें या मिठाई दी जाती हैंसुदी की एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहते हैंसावन की पूर्णिमा को रक्षा बंधन कहते हैं, जिसमें बहनें अपने भाईयों को राखी बांधती हैं और भाई उसे रक्षा का वचन देता हैं

                                                     भाद्र बदी.....अगस्त ....

चतुर्थी व्रत सबसे प्रमुख हैंइस माह की छठ को चाना छठ कहते हैं, जिसमें लडकीयाँ चाँद को देख कर भोजन करती हैं और अष्टमी को कृष्ण जन्म मनाते है, उसे जन्माष्टमी कहते हैं | नौमी को गुगा नौमी आती हैंइस माह की एकादशी को अजा कहते हैं | बारस को बच्छ बारस कहते हैं | इस दिन गाय की पूजा की जाती हैं और गाय के दूध घी या दही का उपयोग नहीं किया जाता हैं | भाद्र बदी की अमावस्या को भादी अमावस्या कहते हैं |

                                                           भाद्र सुदी.....अगस्त ....

 सुदी की तीज को हरतालिका तीज कहते हैं | इस दिन शिव गौरी का पूजन किया जाता हैं | भाद्र पद की चतुर्थी को गणेश जी का जन्म हुआ था, इसलिये हर जगह उस दिन काफी धूमधाम से गणेशोत्सव मनाया जाता हैंभाद्र की पाँचम को ऋषि पंचमी कहते हैंसातम् को दुबडी सातम् आती हैंऔर अष्टमी को राधाष्टमी कहते है दशमी को बाबा रामदेव का मेला राजस्थान में लगता हैं | और पदमा् नामक एकादशी सुदी में आती हैंचौदस को गणेश विर्सजन किया जाता हैं,  इसे अंनत चतुर्दशी कहते हैं | सुदी की पूर्णिमा को श्राद्ध आते हैं | 

                                                                                                      अश्वनीबदी ....सितम्बर ....

अश्वनी बदी से पितृपक्ष शुरू होते हैं | ये अमावस्या तक रहते हैं | इस माह में पितरों के नाम पर तर्पन करते हैं| आसोज बदी माह में इंदिरा एकादशी आती हैं | आशा भगोती का व्रत अष्टमी को किया जाता हैं | अमावस्या के दिन बडा श्राद्ध निकाला जाता है|

                         अश्वनीसुदी .....सितम्बर .....

एकम् से नवरात्रे आंरभ होते हैं | इन्ही दिनों राम रावण के जीवन रुपी लीला का प्रदर्शन किया जाता हैं | पुरे नौ दिन तक रामायण का पाठ किया जाता हैं | दुर्गा माता के आगे झवारे रखे जाते हैं | नवमी के दिन कन्या पूजन किया जाता हैं | सुदी के दशमी के दिन विजया दशमी मनाई जाती हैं | राम की विजय के रुप में विजया दशमी मनाई जाती हैं | पाशांकुशा एकादशी सुदी मे आती हैं | शरद पूर्णिमा के दिन से ही कार्तिक स्नान आंरभ हो जाता हैं |

                             कार्तिक बदी ..... अक्टुबर ....

इस माह को सबसे बडा और पुण्यवान समझा जाता हैं | सबसे ज्यादा व्रत और त्यौहार भी इसी माह में आते हैं |  करवाँ चौथ का व्रत भी इसी माह से शुरु होता हैं | करवाँ चौथ से ही चौथ का व्रत किया जाता हैं | बदी की सातम् को होई सातम और आठम् को होई आठम् का पूजन व व्रत आता हैं | बदी की एकादशी को रमा एकादशी के नाम से जाना जाता हैं | तेरस के दिन धनतेरस मानते हैं जिसमें धन की पुजा की जाती हैं | सोने चांदी की खरिददारी भी की जाती हैं | चौदस के दिन छोटी दिवाली मनाते हैं |  जिसे रुप चौदस भी कहते हैं | अमावस्या के दिन दिवाली मनाते हैं |  रात को लक्ष्मी जी का पुजन कर पुरे घर को दियों से सजाते हैं | कार्तिक माह में कई उपवास किये जाते हैं |  जिनमें तारा भोजन, तारायण नारायण, चंद्रायण व्रत,पंच भीखु आदि होते हैं | अपनी शक्ति और भक्ति के अनुसार करने चाहीये |

                               कार्तिक सुदी.....अक्टुबर....

सुदी की दूज को भाई दूज कहते हैं |.यम द्वितिया भी इसी को कहते हैं | पाँचम् को लाभ पाँचम् या पांडव पाँचम् कहते हैं | बिहार के सूर्य षष्ठी या छठ पूजा भी छठ को आती हैं | अष्टमी को गौपाष्टमी कहते हैं जिसमें गाय की पुजा की जाती हैं | आँवला नौमी जिसमें आँवला की पूजा होती हैं, नवमी को आता हैं | सबसे बडी एकादशी देवउठनी एकादशी जिसमें कहते हैं कि ४ माह के पश्चात देव सो के उठते हैं | तुलसी विवाह भी एकादशी को किया जाता हैं | चौदस को वैंकुठ चर्तुदशी कहा जाता हैं | पूर्णिमा को कार्तिक स्नान समाप्त होता हैं | और देव दिवाली भी तभी मनाते हैं |

                             मंगसिर बदी...... नवम्बर....

मंगसिर बदी को चौथ का व्रत आता हैं | जिसे माही चौथ कहते हैं | सातम् को कालभैरव जयंती आती हैं |  वैतरणी व्रत या उत्पतीएकादशी भी मंगसिर के महीने में आती हैं |

                          मंगसिर सुदी ......नवम्बर ....

इस माह में स्कंद जयंती, मोक्षदा एकादशी और अनंग त्रयोदशी तथा दत्तात्रय जयंती आती हैं |

                                पौष बदी.......दिसम्बर ....

तीज को सौभाग्य सुंदरी का व्रत किया जाता हैं | चौथ का व्रत, सफला एकादशी, दर्शअमावस्या आती हैं | पौष में मलमास लगता हैं जिसमें कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता हैं |

                                       पौष सुदी .......दिसम्बर.....

बंगाल की अनुरुपा षष्ठी मनाई जाती हैं | नौमी से शाकम्भरी नवरात्रे किये जाते हैं | पुत्रदा एकादशी पौष के माह में आती हैं |

                                  माह बदी.......जनवरी.....

माही चौथ का व्रत, षटतिला एकादशी तथा मौनी अमावस्या माह के महिने में आते हैं | मकर संक्राती भी माह में ही आती हैं |

                         माह सुदी......जनवरी ...

माह सुदी में वंसत पंचमी पाँचम के दिन मनाते हैं | बंगाल की शीतला षष्ठी छठ को और सातम् को सूर्य सप्तमी आती हैं | जया एकादशी, भीष्म द्वादशी माह सुदी में आते हैं |

                             फाल्गुन बदी.....फरवरी.....

फागण में चौथ व्रत जो आता हैं उसे भी करना आवश्कय होता हैं | विजया एकादशी नामक एकादशी आती हैं | शिव और पार्वती के विवाह के रुप में शिवरात्री भी इसी महिने में आती हैं | बदी में अमावस्या आती हैं | 

                                                                      फागन सुदी.......फरवरी ......

सुदी में फूलरिया दूज मनाते हैं | दुर्गाष्टमी बदी में आती हैंहोली के ८ दिन पहले होलाष्टक आता हैं |  आमला एकादशी सुदी आती हैं | जयपुर से २ घंटे की दूरी पर रिंगस के पास खाटु में श्याम बाबा का बारस पर मेला लगता हैंजो कि ३ से ५ दिन तक होता हैं | लाखों की तादाद में भक्त दर्शन लेने आते हैंश्यामबाबा को कृष्णवतार मानते हैं | पूर्णिमा के दिन होलि आती हैं | उस रात को होलिका दहन करते हैं | चैतन्य जयंती भी पूर्णिमा को आती हैं |

                       चैत्र बदी......मार्च ......  

एकम् को धुलटी मनाते हैं | इसमें रंग से खेलते हैं | चौथ का व्रत तीज के दिन या चौथ के दिन आता हैं | पाचँम को रंग पचंमी मनाते हैं | शीतला सातम के दिन ठंडा खाना बनाके भोग लगा के खाया जाता हैं | उस दिन गर्म खाना नहीं खाते हैं | पापमोचनी एकादशी आती हैं |

 

 

 

 

 
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