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Saturday, October 21 2017
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"Play Sound" (Mini-MP3-Player 1.2 ©Ute Jacobi)

सुनो सुनो इक कहानी सुनो , ना राजा की ना रानी की

ना आग हवा ना पानी , ना कृष्णा की ना राधा रानी की

दूध झलकता हैं आचँल से आँख से बरसे पानी ...सुनों सुनों

माँ की ममता की है ये कहानी .....सुनो सुनो

इक भक्त जो दीन हीन था कटरे में रहता था

माँ के गुण गाता था माँ के चरण सदा कहता था ...सुनो सुनो

एक बार भैरव उससे कहा कि कल आयेंगे

कई साधुओं सहित तुम्हारें घर खाना खायेंगे

माँ के भक्त ने सोचा कैसे उनका आदर होगा

बिन भोजन के साधुजनो का बडा निरादर होगा ...सुनो सुनो

माता से विनंती कि उसने अन्न कहाँ लाऊ ?

मैं तो खुद भुखा हुँ भोजन कैसे उन्हें खिलाऊ ?

माँ ने कहा तु चिंता मत कर कल तु उन्हें बुलाना

उनके साथ ये सारा गाँव खायेगा तेरा खाना....सुनों सुनों

नमन किया उसने माता को आ गया घर बेचारा

दुजे दिन क्या देखा उसने भरा है सब भंडारा ...सुनों सुनो

उस भैरव जिसने ये सारा षंडयत्र रचाया

कई साधुओं सहित जिमने उसके घर पे आया

अति शुद्र भोजन देखकर बोला माँस खिलाओ

जाओ हमारे लिये कहीं से मदिरा ले कर आओं.....सुनों सुनों

आग बबुला हो गया जब देखा उसने भंडारा

कोध्र से भर के उसने जोर से माता को ललकारा

माँ आई तो उसने कस के माँ के हाथ को पकडा

हाथ छुडा के भागी माता देख रहा था कटरा

अपने रक्षा के खातिर इक चमत्कार दिखलाया

वो स्थान छिपी जहाँ माँ का गर्भजून कहलाया

नो मास का छिप कर वही पर माँ ने समय गुजारा

समय हुवा फिर माँ ने भैरव को संहारा

खड् से सर को जुदा किया थी ज्वाला माँ के अंदर

जहाँ गिरा सर भैरव का वहाँ बना है भैरव मंदिर.....

अपरम्पार है माँ की महिमा जो कटरे में आये

माँ के दर्शन करके फिर भैरव के मंदिर जाये.....

सुनो सुनों....

माँ शेरावालीये माँ ज्योतावालीयें

माँ मेहरावाली ये माँ लाटावाली ये

माँ को जानो माँ को मानो

माँ ही सब कुछ ही है

माँ से बढ के ना कुछ

माँ ही सब कुछ है

जै माता की

 
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