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Tuesday, August 22 2017
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नंदलाल गोपाल दया करके पी.डी.एफ़ छापें ई-मेल

                                                                         

 

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नंदलाल गोपाल दया करके , भवसागर पार उतार मुझे |

विकराल विशाल तंरगों से , करुणा करके कर पार मुझे ||

 

परसेवा परउपकार नहीं , सत्संग समान सुजन सत्कार नहीं ,

न विनय , विवेक न विमल ह्रदय , मुझमें कोई शुचि संस्कार नहीं ,

तुझसे विनंती भी कर पाऊँ , इतना भी कहाँ अधिकार मुझे ? नंदलाल गोपाल ....

 

मैं दुर्जन और दयामय तू , मैं कृपण , कुमति , करुणामय तू ,

मैं वंचित हूँ , तू वत्सल हैं , मैं आश्रित हूँ , और आश्रय तू ,

मैं अधम , अधम ‍उद्धारक तू , इस नाते ही नाथ उबार मुझे ॥ नंदलाल गोपाल ...

 

मैं धिक्कृत हूँ , प्रभु धन्य हैं तू , मैं अणु हूँ , नाथ अनन्य हैं तू ,

तज तुझको , भला मैं किधर जाऊ ? शरणागत हूँ मैं शरण्य हैं तू ,

मैं विषकर , तू विषहारी हैं , मतकर रे अस्वीकार मुझे ॥ नंदलाल गोपाल ...

 

मैं पतित , पतितजनप्राण हैं तू , मैं त्रस्त , तृषित और त्राण हैं तू ,

कहीं और न ठोर ठिकाना मुझे , मैं भोगभुक्त , भगवान हैं तू ,

मैं तेरे पथ का रज कण हूँ , रहने दे अपने द्वार मुझे ॥ नंदलाल गोपाल ...

 

नंदलाल गोपाल दया करके , भवसागर पार उतार मुझे |

विकराल विशाल तंरगों से , करुणा करके कर पार मुझे ||

आचार्य श्री धर्मेंद्र जी महाराज के साभार

 
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