मुख्य पृष्ट arrow भजन संग्रह
दिनमान लघु पंचांग
मुख्य पृष्टपंचांगचौघडियाँमुहूतॅआरती संग्रहव्रत त्योहारभजन संग्रहराशिफलखोजेंअन्य जानकारीहमें सम्पर्क करें
Wednesday, August 23 2017
मुख्य मैन्यु
मुख्य पृष्ट
पंचांग
चौघडियाँ
मुहूतॅ
आरती संग्रह
व्रत त्योहार
भजन संग्रह
राशिफल
खोजें
अन्य जानकारी
हमें सम्पर्क करें
भजन संग्रह
फ़िल्टर     क्रम     दिखायें # 
लेख का शीर्षक
गोविन्‍दाष्‍टकम्
नाम जपन क्यों छोड़ दिया
दर्शन दो घनश्याम नाथ
मन वाणी में वो शक्ति कहाँ
भये प्रगट कृपाला
सखिन्ह मध्य सिय सोहति कैसे...
राम से बड़ा राम का नाम
घूँघट का पट खोल रे
पायो जी मैंने, राम रतन धन पायो ..
मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में
मन तरपत हरि दर्शन को आज
मेरी रक्षा करो बजरंगबली
मंगल मुरत मारुतिनंदन हे बजरंगबली
प्रभुजी तुम चंदन हम पानी
बडी देर भई बडी देर भई, कब लोगे खबर मोरे
मीरा मगन भई
इक दिन गिरजा शिव से बोली
मन तेरा मंदिर
सावन की रुत हैं आ जा माँ
सर्व शक्तिमते परमात्मने श्री रामाय
सूरत दीनानाथ से लगी
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये
जग में सुन्दर है दो नाम,
द्वार पे सुदामा करीब आगया है.
बेगि हरो हनुमान
जय जय नारायण नारायण हरी हरी ,
देवा हो देवा गणपति देवा तुमसे बढ़कर
श्याम मने चाकर राखो जी
कन्हैया तुझे आना पड़ेगा आना पड़ेगा
ठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैंजनियां
नंदलाल गोपाल दया करके
ठुमक ठुमक पग दुमक कुँज मधु
आऊँगी आऊँगी मैं अगले बरस फिर आऊँगी
मेरा आपकी कृपा से,सब काम हो राहा है.
सुनो सुनो इक कहानी सुनो
मैं नही माखन खायो
तेरे सदके तू भेज दे बुलावा
भोर भई दिन चढ़ गया मेरी अम्बे,
भये प्रगट कृपाला दीनदयाला
वो काला इक बासुँरी वाला
आज बिरज में होली रे रसिया
तेरे फूलों से भी प्यार
तुम बसी हो कण कण अंदर
कभी फुर्सत हो तो जगदम्बें
जाना था गंगा पार
दाता एक राम
दुनियाँ चले ना
छम छम नाचे
बस इक बार तु भी आजा ऐ माँ मेरे घर पे..
मेरे तो गिरिधर गोपाल
 
<< आरम्भ < पिछला 1 2 अगला > अंतिम >>
परिणाम 1 - 50 का 64
© 2017 दिनमान लघु पंचांग